Radish Seeds

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मूली फसलों में एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है । मूली गृह-वाटिका की भी मुख्य फसल है । इसको भोजन के साथ कच्ची सेवन करते हैं । मूली को सलाद में, परांठे बनाकर तथा अचार में प्रयोग करते हैं । मूली के सेवन से पाचन-क्रिया सक्रिय रहती है । इसकी पत्तियों की भूजी के रूप मे खाना एक अलग ही स्वाद है । पेट में गैस रोगियों के लिए मूली का सेवन अच्छा रहता है तथा इसमें पानी की अधिक मात्रा होती है । मूली की जड़ व मुलायम पत्तियों के सेवन से शरीर को पोषक-तत्वों की प्राप्ति होती है । जैसे-कैल्शियम,प्रोटीन,कार्बोहाइड्रेट तथा विटामिन ए व सी प्रचुर मात्रा में पर्याप्त होते हैं ।

उन्नत-देशी- यह किस्म शीघ्र तैयार होती है ।। इसकी जड़ें 30-45 सेमी. लम्बी होती हैं जो 40-50 दिन लेती हैं । इस किस्म को मध्य अगस्त से मध्य अक्टूबर तक बोते हैं । यह अगेती किस्म है ।

उन्नत-चेतकी- ये अधिक उपज देने वाली किस्म है । जो ग्रीष्म व शरद ऋतु दोनों के लिए उपयुक्त है । ग्रीष्म ऋतु में गर्मी सहने की क्षमता रखती है । ये 40-45 दिन में तैयार हो जाती है । इसकी जड़ें मध्य लम्बी, नीचे से नुकीली तथा स्वाद वाली होती हैं ।

मूली की फसल के लिए जलवायु ठण्डी होनी चाहिए । इसमें पाला व ठन्ड दोनों को सहने की क्षमता होती है | अच्छे उत्पादन के लिये 8-15 डी0 से0 तापमान उपयुक्त रहता है तथा अधिक वृद्धि करती है । अधिक तापमान से जड़ें कड़ी व चरपराहट तीव्र हो जाती हैं ।